Understand-The-Self

Q.19: सकारात्मक सोच से आप क्या समझते हैं इसे कैसे प्राप्त किया जा सकता है? इसकी उपयोगिता क्या है?

उत्तर : उत्तर– सकारात्मक शब्द का अर्थ होता है जो धनात्मक हो। सोच का अर्थ होता है विचार । व्यक्ति का मस्तिष्क उसका केन्द्र है मनुष्य की सोच दो प्रकार की होती है एक सकारात्मक एवं दूसरी नकारात्मक।

मनुष्य के जीवन में अनेक प्रकार की घटनाएं घटती हैं और उसका प्रभाव व्यक्ति पर आवश्यक रूप से पड़ता है। यह व्यक्ति पर निर्भर होता है कि वह उसके प्रभाव से किस प्रकार प्रभावित होता है । यदि व्यक्ति सकारात्मक सोच रखता है तो जीवन में घटने वाली प्रत्येक घटना के प्रति वह सकारात्मक दृष्टिकोण रखेगा अर्थात् घटना कैसी भी हो व्यक्ति उससे विचलित नहीं होगा।

सकारात्मक सोच इस तथ्य पर आधारित है जैसे कि गीता में कहा गया है–

(i) जो हुआ वह अच्छा हुआ।

(ii) जो हो रहा है वह अच्छा हो रहा है।

(iii) जो होगा वह भी अच्छा होगा।

उपरोक्त तथ्यों को कई व्यक्ति सहर्ष स्वीकार कर लेते हैं और अपना जीवन खुशहाली से बिताते हैं ऐसे व्यक्ति अपने जीवन से अच्छा सामंजस्य स्थापित कर लेते हैं स्वस्थ, प्रसन्नचित्त एवं प्रभावशाली व्यक्तित्व के धनी होते हैं।

सकारात्मक सोच ऐसा कोई वरदान नहीं है जो केवल उन गुरुओं के पास होता है जो जीने का तरीका सिखाते हैं बल्कि अभ्यास द्वारा कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में इसे अपना सकता है ।

सकारात्मक सोच को एक दृष्टांत द्वारा भी समझा जा सकता है उदाहरण के लिए एक गिलास पानी से आधा भरा है।


जो व्यक्ति सकारात्मक सोच रखता है उसका कथन होगा

'गिलास आधा भरा' है'

जो व्यक्ति नकारात्मक सोच रखता है उसका कथन होगा

'गिलास आधा 'खाली' है'।

इसी प्रकार जीवन के प्रत्येक पहलू से संबंधित घटनाओं के प्रति व्यक्ति उसमें अच्छा ही देखने का प्रयत्न करता है जबकि नकारात्मक सोच का व्यक्ति जीवन की प्रत्येक घटना में कुछ कमी या बुरा या आशंका की दृष्टि से देखता है।

जीवन में सफलता के लिए सोच' का अत्यधिक महत्त्वपूर्ण स्थान है।

स्वामी शिवानंद का कथन है ‘सोच के अनुसार ही व्यक्ति अपना जीवन बिताता है'

यदि व्यक्ति स्वयं को दीन–हीन, बेबस, मजबूर, आत्मविश्वासहीन सोचता है तो वह जीवन में कभी सफल नहीं हो पाता क्योंकि आकर्षण के नियम के अनुसार व्यक्ति अपने मस्तिष्क में जो सोचता है बाह्य परिस्थितियाँ उसी अनुसार निर्मित होती जाती हैं एवं आकृष्ट होकर उस व्यक्ति की ओर आती हैं जो वैसा सोचता है।

कहा गया है– यदि आप अपने को तुच्छ समझते हैं तो आप तुच्छ ही हैं परन्तु यदि आप अपने को महान समझते हैं तो आप महान हैं, इसमें कोई संदेह नहीं।'

तात्पर्य यह है कि आप जैसा सोचते हैं वहीं बनते हैं।

सकारात्मक सोच के संबंध में स्वामी शिवानंद जी ने अनेक कथन दिये हैं।

(1) सोच–भाग्य निर्माता।

(2) सोच–द्वारा बाहरी दुनिया का प्रक्षेपण।

(3) सोच–मनोशारीरिक असंतुलन ।

(4) सोच–द्वारा विषाक्त या फलदायी जीवन ।

(5) सोच–द्वारा प्रत्यावर्तित परिस्थितियाँ ।

(6) सोच–द्वारा सार्वभौमिक वातावरण का निर्माण ।

(7) सोच–द्वारा उद्देश्यों की पूर्ति ।

(8) सोच शक्ति द्वारा वातावरण का निर्माण ।

(9) सोच द्वारा भाग्य में परिवर्तन ।

(10) सोच द्वारा शारीरिक असंतुलन एवं व्याधियाँ ।

(11) सोच द्वारा शारीरिक बनावट पर प्रभाव ।

(12) सोच द्वारा तरंगों के माध्यम से इलाज।

(13) सोच द्वारा डॉक्टरी इलाज।

(14) सोच द्वारा बुराइयों का अंत ।

(15) सोच शक्ति द्वारा आदतन विचारों में परिवर्तन ।

(16) सोच–चरित्र से संबंधित ।

(17) सोच से कर्म प्रभावित ।

(18) सोच–बंधनों का कारण ।

(19) सोच–मुक्ति का कारण ।

(20) सोच–विचारों द्वारा संसार की भलाई।

(21) विचार शक्ति द्वारा आध्यात्मिक उन्नति ।

(22) विचार शक्ति आदर्श जीवन का आधार।

(23) विचार शक्ति द्वारा प्रेम एवं साहस का प्रादुर्भाव ।

(24) विचार शक्ति द्वारा शांति एवं ताकत ।

(25) अंतिम विचार–नव जीवन का आधार।

उपरोक्त आधारों पर स्वामी शिवानंद ने विचार या सोच को अत्यधिक बलशाली बतायाहै अतः प्रत्येक व्यक्ति को यह प्रयास करना चाहिये कि अपने जीवन में सकारात्मक सोच को ज्यादा से ज्यादा अपनायें।

सकारात्मक सोच प्राप्त करने के तरीके

(1) अपने रवैये पर नियंत्रण रखें– कई बार व्यक्ति यदि प्रण कर ले कि वह नकारात्मक बिल्कुल नहीं सोचेगा तो वह आसपास फैली हुई नकारात्मकता पर विचार पा सकता है ।

जिंदगी को देखने का नजरिया उसे एक नई दिशा देता है। व्यक्ति को अपने जीवन संबंधी सारे महत्त्वपूर्ण निर्णय खुद लेने चाहिए दूसरों के प्रभाव से निर्णय लेना गलत परिणाम देता है।

(2) ध्यान करें– वैज्ञानिक मानते हैं कि ध्यान के वक्र, जब दिमाग किसी विशेष विचार की ओर केन्द्रित रहता है तो उससे ऊर्जा बिखरती है यह ऊर्जा इंसार को मजबूती प्रदान करती है जिससे वह आम जीवन में कठिन परिस्थितियों का मुकाबला करने में सक्षम होता है।

हर दिन कम से कम 10 मिनट ध्यान करने से, इस प्रयास में सफलता मिल सकती है ।

ध्यान करने के तरीके या विस्तृत गहन जानकारी के आधार पर ध्यान का अभ्यास करने से सफलता अवश्य मिलेगी।

(3) सकारात्मक सोच करने वाले व्यक्तियों से मिले– इस संसार में हर एक इंसान के पास किसी भी विषय को लेकर अपनी एक विचारधारा होती है सकारात्मक विचारधारा वाले व्यक्तियों से मिलने से आपकी सोच और उद्देश्य भी सकारात्मक तरीके से आगे बढ़ेगी जबकि नकारात्मक सोच रखने वाले लोग आपकी जिंदगी से सकारात्मकता को निकाल देते हैं। यदि आप ऐसे लोगों के साथ रहे जो सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर हों तो आपको अपने आप में परिवर्तन जरूर महसूस होगा।

(4) अपने लक्ष्य पर टिके रहें– अपना लक्ष्य अपनी दिली अभिलाषा के अनुसार ही चुनें । उस पर दृढ़ता से टिके रहें चाहे वह कितना ही मुश्किल क्यों न दिखे। उन पर विश्वास करना और उनको पाने के लिये मेहनत करना सीखें । दुनिया को आपको देने के लिये कई नये दृष्टिकोण हैं और इनको अगर आप खुले दिमाग और आशावादी सोच रखते हुए अपनायेंगे तो आपकी जिंदगी बदल जायेगी।

कड़ी मेहनत करें एवं अपने लक्ष्य की ओर हर दिन एक कदम आगे बढ़ायें। एक बार आपने इसे पा लिया तो आप नये जोखिम उठाने की चुनौती ले पायेंगे। हर छोटे या बड़े लक्ष्य को पाने के बाद आपमें अपनी क्षमता के लेकर आत्म विश्वास आयेगा।

(5) अपनी मानसिक रचना में बदलाव लायें– किसी भी परिस्थिति में आपकी प्रतिक्रिया कैसी होती है यह आपकी सोचने की शक्ति में अंतर ला सकता है किसी कठिन परिस्थिति में सकारात्मक प्रतिक्रिया देना उस परिस्थिति को आसान बना देता है और आप आसानी से उससे उबर जाते हैं जबकि नकारात्मक विचारधारा से मुश्किल जरूरत से ज्यादा बड़ी दिखती है। आपके सोचने के तरीके में बदलाव से आप दुनिया को नये नजरिये से देख पायेंगे और देख पायेंगे कि दुनिया कितनी सुन्दर है जिसकी आज तक हमने कल्पना भी नहीं की थी।

(6) अपने स्वभाव पर सवाल उठायें– किसी भी बदलाव का प्रतिरोध करना इंसान की आदत में शामिल होता है। पर जब आप अपने आप पर सवाल उठायेंगे कि आखिर इस प्रतिरोध का मकसद क्या है, आपको अपने आप मुश्किल इतनी बड़ी नहीं दिखेगी जितना आपने सोच रखा था। इसलिए अपने मकसद या उद्देश्य पर सवाल उठाना आपके रक्षात्मक स्वभाव को कम करेगा और आपकी संभावनाओं को देखने की शक्ति प्रदान करेगा ताकि आपका अनुभव बढ़ सके।

आपको यह ध्यान रखना चाहिये कि सकारात्मक सोच सकारात्मकता लाती है जबकि प्रातकूल सोच रखने वाले नकारात्मकता को अपने पास बुलाते हैं। इसलिये सकारात्मक सोच कर आप अपने आप को नयी संभावनाओं के लिए खुला रखते हैं और अपनी जिंदगी जीने योग्य बनाते हैं।


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