म प्र बोर्ड कक्षा 10 प्रश्न पत्र सामाजिक विज्ञान 2017


म प्र बोर्ड कक्षा 10 प्रश्न पत्र सामाजिक विज्ञान 2017

निर्देशः
1.   
सभी प्रश्न अनिवार्य है।
2.   
प्रश्नपत्र में दिये गए निर्देश सावधानीपूर्वक प्रकार प्रश्नों के उत्तर लिखिये।
3.   
प्रश्न क्रमांक 1 से 5 तक वस्तुनिष्ठ एवं अनिवार्य हैं। प्रत्येक प्रश्न 5 अंक का है। कुल 5 5 त्र 25 अंक है।
4.   
प्रश्न क्रमांक 6 से 26 में आंतरिक विकल्प दिये गये है।
5.   
प्रश्न क्रमांक 6 से 10 तक अति लघु उत्तरीय प्रश्न हैं। उत्त्र की शब्द सीमा 30 शब्द है। प्रत्येक प्रश्न पर 2 अंक आवंटित है।
6.   
प्रश्न क्रमांक 11 से 14 तक लघु उत्तरीय प्रश्न हैं। प्रत्येक प्रश्न पर 3 अंक आवंटित है। उत्त्र की शब्द सीमा 75 शब्द है।
7.   
प्रश्न क्रमांक 15 से 21 तक दीर्घ उत्तरीय प्रश्न हैं। प्रत्येक प्रश्न 4 अंक आवंटित है। उत्तर की शब्द सीमा 120 शब्द है।
8.   
प्रश्न क्रमांक 22 से 26 तक दीर्घ उत्तरीय प्रश्न हैं। प्रत्येक प्रश्न 5 अंक आवंटित है। उत्तर की शब्द सीमा 150
9.   
प्रश्न क्रमांक 22 का उत्तर दिये गये निर्देशानुसार भारत के रेखा मानचित्र पर दर्शाइये।
1.   
सही विकल्प चुनकर लिखिए:
      (
अ)    आन्ध्र प्रदेश और उड़ीसा के डेल्टा क्षेत्रों तथा गंगा के मैदानों में सामान्यतः कौन-सी मिट्टी पाई जाती है?              (1x5=5)
            (
i)   लाल मिट्टी       (ii)     जलोढ़ मिट्टी
            (
iii)  काली मिट्टी      (iv)    लैटेराइट मिट्टी
      (
ब)    निम्नलिखित उद्योगों में से सबसे अधिक वायु प्रदूषण किसमें होता है?     
            (
i)    दियासलाई उद्योग        (ii)     कागज़ उद्योग
            (
iii रासायनिक उद्योग         (iv)    फर्नीचर उद्योग
      (
स)    मुम्बई बंदरगाह के दबाव को कम करने हेतु विकसित बंदरगाह है-
            (
i)     पाराद्वी  (ii)     हल्दिया
            (
iii)    न्हावाशेवा       (iv)   कांडला
      (
द)    विश्व स्तर र पहला भू शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ था-
            (
i)     जापान (याकोहामा)       (ii)     भारत (बैंगलुरू)
            (
iii)    ब्राजील (रियोडिजेनिरो)    (iv)    यू.एस.ए. (न्यूयार्क)
      (
इ)    निम्नलिखित में से कौन उदारवादी विचारों का नहीं था?
            (
i)     दादा भाई नौरोजी       (ii)     अरविन्द घोष
            (
iii)    गोपालकृष्ण गोखले      (iv)    फिरोजशाह मेहता

2.   
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए:                  (1x5=5)
      (
अ)    संयुक्त वन प्रबंधन व्यवस्था में वन सुरक्षा समितियाँ  का महत्वपूर्ण स्थान है।
      (
ब)    वाईसराय लार्ड लिटन  की प्रतिक्रियावादी नीति प्रजातीय भेद-भाव से रिपूर्ण थी।
      (
स)    समानता का अधिकार संविधान में वर्णित मूल अधिकार  में से एक है।
      (
द)    स्थानीय प्रशासन की सबसे छोटी इकाई ग्राम पंचायत है।
      (
इ)    जय हिन्द का नारा सुभाष चन्द्र बोस  ने दिया था।
3.   
एक वाक्य में उत्तर दीजए:               (1×5=5)
      (
अ)    जम्मू-कश्मीर को किस अनुच्छेद के अन्तर्गत विशेष राज्य का दर्जा दिया गया है?
       उत्तर :
अनुच्छेद 370

      (ब)    कौन-से संशोधन द्वारा संविधान में ‘‘मूल कर्तव्य’’ जोड़ा गया है?
 
      उत्तर : 42 वे संशोधन      

      (स)    लोकसभा की सदस्यता के लिए न्यूनतम आयु क्या है?
     
 उत्तर :25 वर्ष

       द)    विश्व की कुल जनसंख्या का कितना प्रतिशत भाग भारत में निवास करता है?

      उत्तर : 16.87%
      (
इ)    भारतीय योजना आयोग का गठन कब किया गया था?

      उत्तर :15 मार्च 1950
4.   
सही जोड़ी बनाइये:                    (1×5=5)
      1.   
आन्ध्र प्रदेश            क.     द्वितीय क्षेत्र
      2.   
अमत्र्य सेन            ख.     तेलंगाना
      3.   
सीमेन्ट कारखाना        ग.     जीवन स्तर में वृद्धि
      4.   
डिजिटल चार्ट्स         घ.     आर्थिक कल्याण
      5.   
iभोक्ता जागरुकता      ड.     मालदीव्

     उत्तर : 1(ख) 2(घ) 3(क) 4(ड) 5(ग)
5.   
सत्य/असत्य बताइए।                  (1×5=5)
      (
अ)    आर्थिक विकास एक सतत् एवं निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया है। सत्य
      (
ब)    कृषि प्राथमिक क्षेत्र के अन्तर्गत आती है। सत्य
      (
स)    उपभोक्ता प्रत्येक व्यक्ति नहीं होता है। असत्य
      (
द)    औद्योगिक तथा उपभोक्ता वस्तुओं के लिए हालमार्क चिन्ह दिया जाता है असत्य
      (
इ)    समाजवाद में केन्द्रीय नियोजन अनिवार्य है। सत्य
6.   
भौम जल पाने के स्रोत क्या हैं?              2
        1 कुआं २.ट्यूबवेल            

        अथवा
     
गुलाबी क्रान्ति क्या है?

 गुलाबी क्रांति हमारे देश में विभिन्न जलवायु एवं मृदा का उपयोग करते हुए उष्ण एवं     शीतोष्ण कटिबंधीय फलो (सेव आम केला नारियल का जूस अनार संतरा नाशपाती आदि)     की कृषि को विकसित करने पर जोर दिया गया है इसे ही गुलाबी क्रांति का नाम दिया       गया है
7.   
सहायक सन्धि व्यवस्था क्या थी? इसको किसने लागू किया था?     2
सहायक संधि हस्तक्षेप की नीति थी जिसका प्रयोग भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड वेलेजली (1798-1805 ई.) द्वारा भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की स्थापना के लिए किया गया| इस प्रणाली में यह कहा गया की प्रत्येक भारतीय शासक को अपने राज्य में ब्रिटिश सेना के रख-रखाव के लिए धन का भुगतान करना होगा और इसके बदले में ब्रिटिश उनकी उनके विरोधियों से सुरक्षा करेंगे |इस संधि ने ब्रिटिश साम्राज्य का अत्यधिक विस्तार किया |             

अथवा
     
बहिष्कार का अर्थ स्पष्ट कीजिए।

बहिष्कार का अर्थ विरोध करना है जैसे कि अंग्रेजों के जुल्मों से निजात दिलाने के लिए बापू ने विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार का आंदोलन छेड़ा था इसके अंतर्गत विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार, विदेशी वस्तुओं की होली जलाना, विदेश में निर्मित नमक एवं चीनी का बहिष्कार, विदेशी वस्तुओं के प्रयोग वाले धार्मिक विवाह समारोहों का बहिष्कार करने हेतु ब्राह्मणों से अपील करना तथा धोबियों द्वारा विदेशी कपड़े धोने से इंकार करने का आग्रह करना जैसे कार्यक्रम शामिल थे। यह कार्यक्रम अत्यंत लोकप्रिय हुआ तथा इसे राजनीतिक स्तर पर अत्यंत सफलता मिली।
8    
राष्ट्रीय आय की गणना किस समय (अवधि) में की जाती है? लिखिए। 2

 राष्ट्रीय आय किसी देश की ओर से एक साल में उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं की कीमत (प्राप्ती) होती है। जितनी ज्यादा राष्ट्रीय आय होगी उसी अनुसार किसी भी अर्थव्यवस्था या देश का विकास आगे बढ़ता है। राष्ट्रीय आय के आंकड़ों से यह जाना जा सकता है कि किसी देश का विकास कितनी तेजी बढ़ रहा है।

राष्ट्रीय आय की गणना 1 अप्रैल से 31 मार्च के बीच कि जाती है
                     अथवा
       राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी अधिनियम के अन्तर्गत किस प्रकार के श्रम को रोजगार दिया जाता है?

यह योजना प्रत्येक वित्तीय वर्ष में किसी भी ग्रामीण परिवार के उन वयस्क सदस्यों को 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराती है जो प्रतिदिन 220 रुपये की सांविधिक न्यूनतम मजदूरी पर सार्वजनिक कार्य-सम्बंधित अकुशल मजदूरी करने के लिए तैयार है


9.   
अधोसंरचना किसे कहते हैं?                  2

अधोसंरचना किसी भी आधुनिक विकास को आधारशिला होती है। इसका संबंध किसी भी देश या क्षेत्र को अर्थव्यवस्था की उचित वृद्धि या विकास को सुविधाजनक बनाने के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं, सुविधाओं और संरचनाओं से है। इसमें उपयुक्त सडकें और पुल, बिजली आपूर्ति, पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पेय जल, सिंचाई की सुविधाएं दूरसंचार एवं परिवहन, उर्वरक, बीज, सामाजिक अधोसंरचना इत्यादि शामिल हैं । संक्षेप में कहा जाये तो, अधोसंरचना के अर्थव्यवस्था का ढांचा
                     अथवा
     
सेवा क्षेत्र क्या है? लिखिए।

अर्थव्यवस्था का वह क्षेत्र जो सेवा से सम्बंधित कार्यो में लगा हुआ है सेवा क्षेत्र कहलाता है| सेवा क्षेत्र में मुख्य रूप से शामिल होने वाली सेवाएं इस प्रकार हैं:- परिवहन, कूरियर, सूचना क्षेत्र की सेवाएं, प्रतिभूतियां, रियल एस्टेट,होटल एवं रेस्टोरेंट, वैज्ञानिक और तकनीकी सेवाएं, अपशिष्ट प्रबंधन, स्वास्थ्य कल्याण और सामाजिक सहायता; तथा कला, और मनोरंजन सेवाएं इत्यादि आतीं है
10.  
उपभोक्ता शोषण से क्या आशय है?                  2

उपभोक्ता शोषण
जब एक उपभोवता किसी तरीके से गोया देते है या तो दुकानदार या उत्पादक द्वारा कम गुणवता अथवा घटिया वस्तुएँ उसे दी जाएँ तथा इन वस्तुओं और सेवाओ के लिए अधिक मूल्य लिया जाए, तो इसे उपभोवत्ता शोषण कहते है । निम्न तरीकों द्वारा उपभोवता को उगाब द्वारा धोखा दिया जाता है :
1. उच्च मूल्य 2. अनुचित तौल तथा अनुचित 3. उप मानक गुणवत्ता 4. मिश्रित तथा अशुद्ध उत्पाद
5. अनुचित सूचना


अथवा
     
कालाबाजारी किसे कहते हैं?

कालाबाजारी आम आदमी की जरूरत के सामान को कुछ व्यापारी जब कम कीमत रहती है तब स्टॉक कर लेते हैं जिस से उस सामान की मार्केट में कमी आ जाती है जिसके कारण सामान की कीमत बढ़ जाती है और जब कीमत बढ़ जाती है तो व्यापारी उन्हें ऊंचे दामों पर बेच अधिक मुनाफा कमाता है इसे कालाबाजारी कहते है
11.  
मानव जीवन में मृदा का क्या महत्व है? समझाइये।               3

पृथ्वी पर एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन मिट्टी है जो प्रत्यक्ष रुप से वनस्पतियों और धरती पर मानव जाति तथा पशुओं को अप्रत्यक्ष रुप से सहायता करती है। ये पृथ्वी पर हर जगह उपलब्ध बहुत जटिल तत्व है। उपजाऊ मिट्टी वो मिट्टी है जो फसलों को बढ़ने में मदद करती है। मिट्टी दुनिया का सारा मल, कूड़ा या हर तरह की गन्दगी को अपने अंदर समा लेती है और खुद अपने आप में शुद्ध हो जाती है। ज़मीन के अंदर जो कुछ भी दबा दिया जाता है वह मिट्टी बन जाता है।
अथवा
     
वनों का संरक्षण क्यों आवश्यक है?

पर्यावरण वैज्ञानिकों के अनुसार एक परिपक्व वन वातावरण को निम्न चीजें प्रदान करते हैं जैसे- ऑक्सीजन आपूर्ति, वायु प्रदूषण रोकने में सहायक, नमी नियंत्रण, जल प्रदूषण रोकने में मददगार, मृदा की उर्वरता बढ़ने के साथ अपरदन रोकना। अतः वनों का संरक्षण आवश्यक है। वनों का महत्त्व इस प्रकार है- जलवायु नियंत्रण में सहायक, बाढ़ नियंत्रण, पशुओं के चारे का आधार, जड़ी-बूटियों का भण्डारण, वन्य प्राणियों का आश्रय स्थान, कृषि यंत्रों एवं औद्योगिक कच्चे माल का भण्डारण।
12.  
उद्यानिकी विकास कार्यक्रम के प्रमुख प्रावधान बताइए।             3

उद्यानिकी वानिकी
उद्यानिकी वानिकी का मुख्य उद्देश्य विभिन्न उद्यानिकी फसलों एव कृमि के अनुपयोगी भूमि का विकास तथा पड़त भूमि ने उद्यानिकी फसले लगाकर उसका समुचित उपयोग करना है उद्यानिकी विकास के लिए विभाग के क्रियाकलापों मॅ विभिन्न फसलों का पौधरोपण एवं वानिकी पौधरोपण और विपणन प्रमुख योजना के अन्तर्गत उच्च गुणवता के पौधरोपण तैयार करना, संकर तथा उद्धत किस्सों के बीजोत्पादन, निजी तथा सार्वजनिक क्षेत्र में लिया जाना है . आँवला, सस्ता, अमरूद, बेर. सीताफल. अमर एव केले के नए बगीचे तेयार किया जाना है इसके अलावा आम, अमरूद, सत्र आदि के पुराने बगीची का जीपर्गद्धार करना, मसाना फसलों का उत्पादन एव पुष्प उत्पादन का कार्यक्रम लेना, समन्वित कीट एव पोषक तत्व प्रबन्धन प्रणाली को लागू करना.


अथवा
     
खनिज पदार्थ का क्या महत्व है?
13.   1857
के संग्राम को प्रथम स्वतंत्रता संग्राम क्यों कहा जाता है?      3

लॉर्ड कैनिंग के गवर्नर-जनरल के रूप में शासन करने के दौरान ही 1857 ई. की महान् क्रान्ति हुई। इस क्रान्ति का आरम्भ 10 मई, 1857 ई. को मेरठ से हुआ, जो धीरे-धीरे कानपुर, बरेली, झांसी, दिल्ली, अवध आदि स्थानों पर फैल गया। इस क्रान्ति की शुरुआत तो एक सैन्य विद्रोह के रूप में हुई, परन्तु कालान्तर में उसका स्वरूप बदल कर ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध एक जनव्यापी विद्रोह के रूप में हो गया,इसलिए इसे भारत का प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम कहा गया।
अथवा
     
भारतीय शासकों में ब्रिटिश शासन से असन्तोष के क्या कारण थे?

अंग्रेजों की राज्य-विस्तार नीति के कारण भारत के अनेक शासकों और सरदारों में उनके प्रति असंतोष व्याप्त हो गया था । अंग्रेजों ने उनके साथ सहायक-संधि कर ली थी । मगर अंग्रेज इन संधियों को मनमर्जी से तोड़ देते थे । सिंध, पंजाब और अवध को अंग्रेजों ने हथिया लिया था । इससे काफी असंतोष फैला था । डलहौजी ने ‘विलय नीति’ को कड़ाई से लागू किया तो असंतोष और भी अधिक बढ गया ।
14.  
भारत में राष्ट्रीय जागृति के विकास में पश्चिम के विचारों और शिक्षा ने क्या भूमिका निभाई? 3
अथवा
     
अंग्रेजों के आर्थिक शोषण की नीति ने भारतीय कुटीर उद्योगों को कैसे प्रभावित किया?

ब्रिटिश सरकार की आर्थिक शोषण की नीति ने भारतीय उद्योगों को बिल्कुल नष्ट कर दिया था। यहाँ के व्यापार पर अंग्रेजों का पूर्ण अधिकार हो गया था। भारतीय वस्तुओं पर जो बाहर जाती थी, भारी कर लगा दिया गया और भारत में आनेवाले माल पर ब्रिटिश सरकार ने आयात पर बहुत छूट दे दी। इसके अतिरिक्त अंग्रेज भारत से कच्चा माल ले जाते थे, इंग्लैण्ड से मशीनों द्वारा निर्मित माल भारत में भेजते थे, जो लघु एवं कुटीर उद्योग धन्धों के निर्मित माल से बहुत सस्ता होता था।
परिणामस्वरूप भारतीय बाजार यूरोपियन माल से भर गए एवं कुटीर उद्योग धन्धों का पतन हो जाने से करोड़ों की संख्या में लोग बेरोजगार हो गए। भारत का धन विदेशों में जा रहा था अतः भारत दिन-प्रतिदिन निर्धन होता गया।


15.  
प्रदूषण का मानव जीवन पर प्रभाव बताइए।               4

 

प्रदूषण से मानव जीवन बहुत अधिक प्रभावित होता है प्रदूषण तीन टाइप के होते हैं जल प्रदूषण वायु प्रदूषण भूमि प्रदूषण वायु प्रदूषणा से अवांछित गैसों की उपस्थिति से मनुष्य, पशुओं तथा पक्षियों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इससे दमा, सर्दी-खाँसी, अँधापन, श्रव का कमजोर होना, त्वचा रोग जैसी बीमारियाँ पैदा होती हैं। लंबे समय के बाद इससे जननिक विकृतियाँ उत्पन्न हो जाती हैं और अपनी चरमसीमा पर यह घातक भी हो सकती है।

जल प्रदूषण से पीने के पानी की कमी बढ़ती है, क्योंकि नदियों, नहरों यहाँ तक कि जमीन के भीतर का पानी भी प्रदूषित हो जाता है।

भूमि प्रदूषण से भूमि उत्पादित भोज्य पदार्थों के स्रोतों को दूषित होना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है


अथवा
     
राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में उद्योगों के योगदान का वर्णन कीजिए।

उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था को कई प्रकार से प्रभावित करते हैँ-
1 इनके द्वारा व्यापक मात्रा में व्यपार का सृजन होता है।
2 इनके द्वारा मूल्य बर्धन के मायम से रास्ट्रीय आय में बृद्धि लायी जाती है। यह निर्यातों में बृद्धि ताने में सहायता होते हैं ।
3 यह कृषि बिकास को प्रोत्साहित करते ' ।

४. रोजगार उत्पन करते हैं

५ विदेशी मुद्रा भंडार को संचित करते हैं

16.  
"रेल मार्गों का वितरण भारत में असमान है" स्पष्ट कीजिए।         4
अथवा
     
भारत में निर्यात संवर्धन के लिए किए गए प्रयासों का वर्णन कीजिए।
17.  
बाढ़ के प्रभावों को स्पष्ट कीजिए। (कोई चार)                    4

बाढ़ के प्रभाव या बाढ़ के नुकसान

1 मौत : बाढ़ के कारण मनुष्य ओर मवेशियों कि जान माल का नुक्सान होता है  !

2 यातायात में कठिनाई : बाढ़ के पानी के वजह से सड़क, रेल एवं हवाई यातायात भी प्रभावित हो जाता है !

3 किसानों पर प्रभाव : बाढ़ का प्रभाव सबसे ज्यादा किसानों पर होता है क्योंकि उसका फसल पूरी तरह तबाह बर्बाद हो जाता है

4 संसाधनों का नुकसान : सड़क, रेल पटरियों , भवनों, नादियों के किनारों आदि का बह जाना 


अथवा
     
आपदा प्रबंधन से क्या आशय है? आपदा प्रबंधन के मुख्य तत्व बताइए।

आपदा प्रबंधन : आकस्मिक विपदाओं से निपटने के लिए संसाधनों का योजनाबद्ध उपयोग और इन विपदाओं से होने वाली हानि को न्यूनतम रखने की कुंजी है। आपदा प्रबंधन विकसित देशों की महत्वपूर्ण प्राथमिकता है और उसे पूरे वैज्ञानिक तरीके से उन्नत किया जा रहा है। किसी राष्ट्र को केवल उसकी आर्थिक समृद्धि या सामरिक शक्ति के आधार पर विकसित या विकासशील नहीं माना जा सकता। विकसित या विकासशील राष्ट्र होने के लिए ज़रूरी है आधारभूत सेवाओं जैसे स्वास्थ्य, परिवहन, संचार, शिक्षा आदि का भी विश्वस्तरीय होना। ये मानक हैं विकास के और इन्हीं मानकों में से एक है 'आपदा प्रबंधन'।

आपदा प्रबंधन के तत्‍व - रोकथाम, जोखिम कम करना, प्रत्‍युत्‍तर तथा बहाली। योजना के तहत सरकार के समस्‍त विभागों और एजेंसियों के बीच हर प्रकार के एकीकरण का प्रावधान किया गया है। योजना में पंचायत और शहरी स्‍थानीय निकायों सहित प्रत्‍येक सरकारी स्‍तर पर भूमिका और दायित्‍व के विषय में उल्‍लेख किया गया है। यह योजना क्षेत्रीय आधार को ध्‍यान में रख कर बनाई गई है जो न सिर्फ आपदा प्रबंधन के लिए बल्कि विकास योजना के लिए भी लाभकारी है।

 


18.  
क्रान्तिकारी आन्दोलनों का भारत के इतिहास में महत्व स्पष्ट कीजिए। 4
अथवा
     
झण्डा सत्याग्रह को संक्षिप्त में लिखिए।

रारुट्रीय ध्वज किसी राष्ट्र की त्तम्प्रनुता, अस्मिता और गौरव का प्रतीक होता है भारतीय रवतत्रता सगाम के दिनों ने चरखा युक्त तिरंगे झण्डे का या दर्जा प्राप्त रहा है 1923 में इस ध्वज की अल-बान-शान को लेकर एक ऐसा प्रसंग उपस्थित हो गया जिसमें न केवल राष्टीय ध्वज के पति सम्पूर्ण राष्ट्र की अद्धा और निष्ठा की मुखर अभिव्यक्ति हुई, बल्कि फिरंगी हुकूमत तक को उसे मान्य करने पर विवश होना पडा इतिहास के इस स्वर्णिम अध्याय को ‘झण्डा सत्याग्रह’ के नास से जाना जाता है असहयोग आन्दोलन की मानसिक तैयारी की पश्चात के लिए गठित काग्रेस की समिति जबलपुर आई हकीम अजमल खाँ उसके नेता थे. जबलपुर काग्रेस कमेटी ने तय किया कि खाँ साहेब को अभिनन्दन पत्र भेट किया जाएगा और जबलपुर नगरपालिका भवन पर राष्टीय तिरगा ध्वज फहरायै जाने का यह पहला ही अवसर आ और यह सम्मान गोरे डिप्टी कमिश्नर को ब्रिटिश हुकूमत का अपमान और चुनौती देता हुआ प्रतीत हुआ यह भड़क उठा. उसने पुलिस को हुक्म दिया कि तिरंगे झण्डे को न केवल उतार दिया जाये वल्कि पैरो से कुचला भी जाये जिसका परिणति स्वत्मादिक रूप से तीव्र जनाक्रोश ने ही फूटना आ आन्दोलन आरच्चम हो गया जिसने कुछ ही महीनो ने अखिल भारतीय स्वरूप ग्रहण कर लिया फिरंगी हुकूमत की अपमानजनक कार्यवाही के विरोध में तपस्वी प सुन्दरलाल सुभद्रा कुमारी चौहान, नाथूराम मोदी, नरसिंह दास आवास, लक्ष्मणसिंह चौहान तथा कुछ अन्य स्वयंसेवकों ने झण्डे के साथ जुलूस निकाला पुलिस ने जुलूस को आगे बढ़ने से रोक दिया और सभी नेताओं को गिरफ्तार कर लिया तपस्वी प सुन्दरलाल पर मुकदमा चला और उन्हें छ: माह के कारावास की सजा दी गई नगरपालिका जबलपुर के सभी सदस्यों ने विरोध स्वरूप सश्वाघूहिक इस्तीफा दे दिया अद्धा त्तत्याग्रहिर्या की पहली टोली की गिरफ्तारी के बाद दूसरे जत्थे ने, जिसमें प्रेमचन्द्र, सीताराम जाधव. छिगौलाल स्वर्णकार, टोडरलाला थे , टाउन हाल पर झण्डा प्यारा दिया बस यहीं से धधकीं थीं झण्डा आन्दोलन की ज्वाला
19.  
भारत सरकार ने पाकिस्तान सरकार से कबाइलियों का मार्ग बन्द करने को क्यों कहा था? लिखें। 4
अथवा
     
ताशकन्द समझौता क्या है? इसकी शर्तों का उल्लेख कीजिए।
20.  
संधात्मक व संसदीय शासन व्यवस्था का वर्णन कीजिए।            4

संघीय शासन व्यवस्था क्या है और ये कैसे काम करती है ?
संघीय व्यवस्था में दो प्रकार की सरकारे होती है -
केंद्र सरकार
राज्य सरकार
केंद्र सरकार राष्ट्रीय समस्याओ का समाधान करती है तथा राज्य सरकारे स्थानीय समस्याएँ हल करती है . असल में , इस प्रकार की व्यवस्था में शक्तियों में केन्द्रीय सत्ता तथा संघ बनाने वाले अलग - अलग राज्यों में बांटा जाता है . सम्पूर्ण देश के लिए एक सरकार होती है . और दोनों स्तरों को अपनी अलग - अलग शक्तियाँ होती है . संघवाद की कुछ विशेषताएँ निम्नलिखित प्रकार से है
संघवाद में ।तेर्धायेका दो स्तरों की होती है . इसका अर्थ है को एक सदन अलग - अलग राज्यों
का प्रतिनिघित्व करता है तथा दूसरा सदन जाता का प्रतिनिघित्व कस्ता है
संघवाद में दो प्रकार की सरकार होती है . लेकिन दोनो स्तर एक ही जनता पर राज करते है और सरकार के हर अलग - अलग स्तर की अपनी - अपनी शक्तिया होती है .
प्रत्येक स्तर को शक्तियों सविघान में साफ - साफ लिखी होती है … और कोई भी अपनी सीमा को पार नही कर सकता .
संसदीय शासन प्रणाली में व्यवस्थापिका का वास्तविका कार्यपालिका पर भी नियंत्रण होता है क्योंकि मंत्रीपरिषद व्यवस्थापिका के प्रति उत्तरदायी होती है। यही कारण है जिनके आधार पर व्यवस्थापिका को प्रधानता एवं प्राथमिकता प्रदान की जाती हैं। संसदीय लोकतंत्र में व्यवस्थापिका सरकार के तीनों अंगों में सबसे महत्वपूर्ण व्यवस्थापिका है। यह सरकार कावह अंग है जो राज्य की इच्छाओं को कानून का रूप देता है। प्रजातंत्र शासन केपूर्व में राजा ही यह काम करता था, लेकिन आधुनिक लोकतंत्रिक युग में लगभगसभी प्रगतिशील देशों में अब यह काम जनता के चुने हुए प्रतिनिधि करते हैं।तुलनात्मक दृष्टि से कार्यपालिका और न्यायपालिका दोनों से व्यवस्थापिका कामहत्व अधिक बड़ा है। क्योंकि यह विभाग ही उनके कानूनों का निर्माण करता हैजिनके अनुसार कार्यपालिका विभाग शासन करता है तथा न्याय विभाग न्याय करताहै | व्यवस्थापिका का महत्व किसी देश में प्रचलित शासन के प्रकार पर निर्भर करता है। संसदीय शासन प्रणाली के अंतर्गत व्यवस्थापिका का कार्यपालिका पर प्रत्यक्ष नियंत्रण होता है और मंत्रीमण्डल पूर्णतः व्यवस्थापिका के प्रति उत्तरदायी रहता है।इस तरह ऐसी शासन प्रणाली में व्यवस्थापिका का स्थान सरकार के सब विभागों में सबसे उच्च होता है | व्यवस्थापिका जनता द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधियों की संस्थाहोने के कारण जनता की संप्रभुता का उपयोग करती है। इसके सदस्यों का यहप्रमुख कर्तव्य है कि कार्यपालिका द्वारा शक्तियों के दुरूपयोग एवं उसकीस्वेच्छाचारिता के विरूद्ध अपने मतदाता के हितों की रक्षा करे। इस उत्तरदायित्व को निभाने के लिए उनको संविधान द्वारा यह शक्ति सौंपी जाती है कि कार्यपालिका के कायाँ पर निरंतर नियंत्रण रखें

अथवा
    भारत के नागरिकों के मौलिक अधिकार कौन-कौन से हैं? (कोई चार लिखिए)
भारत के संविधान की एक अन्य प्रमुख विशेषता है देश के नागरिकों के मौलिक अधिकार। ये ऐसे अधिकार हैं जो देश के प्रत्येक नागरिक को उपलब्ध हैं भले ही वह किसी भी धर्म, जाति, संप्रदाय या आय वर्ग का हो। वह उच्च शिक्षित हो या निरक्षर महिलाओं एवं पुरुषों को समान रूप से ये अधिकार हासिल हैं। इनके लिये किसी भी विशेष योग्यता की आवश्यकता नहीं है बल्कि भारत का नागरिक होने मात्र से ही ये अधिकार प्राप्त हो जाते हैं। इन अधिकारों का हनन करने का अधिकार किसी भी सरकार तक को नहीं है न ही किसी व्यक्ति विशेष को भले ही वह कितना ही उच्च पदस्थ या प्रभावशाली क्यों न हो।
(1) समानता का अधिकार:- संविधान के अनुच्चेद 14-18 में वर्णित इस अधिकार के तहत नागरिकों को कानून के समक्ष समानता तथा कानून का समान संरक्षण प्राप्त है। इस अधिकार के अनुसार भारतीय नागरिकों में धर्म, जाति, नस्ल, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेद नहीं किया जा सकता। सार्वजनिक स्थान का उपयोग सभी लोग समान अधिकार से कर सकते हैं।
(2) शोषण के विरूद्ध अधिकार :- इस अधिकार के तहत किसी भी व्यक्ति से जबरन कार्य लिये जाने पर रोक का प्राविधान है। इस अधिकार से उस बेगार प्रयास पर भी रोक लगार्इ गर्इ जो पराधीन भात में प्रचलित थी। इसी अधिकार द्वारा 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को खतरे वाले कायोर्ं में लगाए जाने को भी निषिद्ध किया गया है।

(3) धार्मिक स्वतन्त्रता का अधिकार :- इस अधिकार के तहत भारत के नागरिकों को अपनी इच्छा के अनुरूप किसी भी धर्म को अपनाने व मानने की स्वतन्त्रता दी गर्इ है। इसमें राज्य के शिक्षण संस्थानों में धार्मिक शिक्षा दिये जाने को भी निषिद्ध किया गया है।

(4) सांस्कृतिक एवं शिक्षा सम्बन्धी अधिकार :- इसके द्वारा भारतीय नागरिकों को अपनी पृथक भाषा, लिपि व संस्कृति को अपनाने व संरक्षित करने के साथ ही राजकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में जाति, धर्म या भाषा के आधार पर प्रवेश दिये जाने में भेदभाव पर रोक लगार्इ गर्इ है। इसके तहत भाषार्इ व धार्मिक अल्पसंख्यकों को शिक्षा संस्थाऐं स्थापित करने व धर्म व भाषा के आधार पर भेद किये बगैर राजकीय सहायता प्राप्त करने की छूट दी गर्इ है।
 

 

21.   मिश्रित अर्थव्यवस्था से आप क्या समझते हैं एवं मिश्रित अर्थव्यवस्था के दोष लिखिए। (कोई तीन)      4


मिश्रित अर्थव्यवस्था पूँजीवादी और समाजवादी अर्थव्यवस्थाओं का मिश्रित रूप है। मिश्रितअर्थव्यवस्था में निजी और सार्वजनिक क्षेत्र साथ-साथ पाए जाते हैं। वे आर्थिक नियोजन केअनुशासन के अंतर्गत कार्य करते हैं। राज्य सभी आर्थिक कार्यकलापों को नियंत्रित नहीं करता।इस प्रकार की अर्थव्यवस्था के बारे में यह समझा जाता है कि इससे युक्तिसंगत आर्थिकविकास, आय की कम असमानता और संतुलित क्षेत्रीय संवृद्धि होती है जिससे देश की आमजनता के हित सुरक्षित रहते हैं। भारत में, हमारे पास मिश्रित अर्थव्यवस्था है|

 मिश्रित अर्थव्यवस्था में उपस्थित होने वाले दोष अग्रलिखित है:
1. व्यावहारिकता में निर्बल एवं अंकुश प्रणाली
मिश्रित अर्थव्यवस्था की सफलता पर आलोचकों द्वारा प्रश्न चिन्ह इस आधार पर लगाया जाता है कि मिश्रित अर्थव्यवस्था का सैद्धान्तिक पक्ष चाहे कितना मजबूत क्यों न हो व्यावहारिकता में यह एक निर्बल आर्थिक नीति है ।
2. राष्ट्रीयकरण का भय
मिश्रित अर्थव्यवस्था में निजी क्षेत्र को सरकारी राष्ट्रीयकरण का भय सदैव बना रहता है । इस भय के कारण व्यक्तिगत उद्यमी में व्यावहारिक रूप से विनियोग के प्रति विशेष रुचि एवं प्रेरणा उत्पन्न नहीं हो पाती ।
3. अस्थिरता
मिश्रित अर्थव्यवस्था में सरकारी नीतियां अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करती है । सरकारी नीतियां स्थायी नहीं होती और सरकार समय-समय पर औद्योगिक नीति द्वारा निजी क्षेत्र एवं सार्वजनिक क्षेत्र का विभाजन परिवर्तित करती रहती है । जिसके कारण अर्थव्यवस्था में अस्थिरता का वातावरण बना रहता है ।
4. लालफीताशाही को बढ़ावा
मिश्रित अर्थव्यवस्था का संचालन सरकार एवं उसके प्रशासन तंत्र द्वारा किया जाता है । प्रशासन तंत्र की लालफीताशाही व्यक्तियों की स्वतंत्रता एवं प्रेरणा पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है । लालफीताशाही एवं अफसरशाही से अनेक बार अच्छी योजनाओं का उचित एवं समयबद्ध क्रियान्वयन नहीं हो पाता । लालफीताशाही भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा देती है ।


अथवा
     
वैश्वीकरण को प्रोत्साहित करने वाले प्रमुख चार कारक लिखिए।

वैश्वीकरण, समूचे विश्व में राजनीतिक, आर्थिक तथा सामाजिक परिप्रेक्ष्य में महत्वपूर्ण परिवर्तन ला सकता है। वैश्वीकरण राज्यों तथा समाजों के बीच बहुगुणित सघनता है, जोकि आज के विश्वव्यवस्था कीप्रमुख पहचान बन सकता है। यह अवधारणा उन तथ्यों को रेखांकित करती है, जिसके आधार पर विश्वके एक क्षेत्र में निर्णयों, गतिविधियों तथा घटनाओं का प्रभाव विश्व के दूसरे भागों पर प्रभावी रूप सेपड़ता है। वैश्वीकरण को दो संदर्भों - विस्तार तथा सघनता के परिप्रेक्ष्य मेंसमझा जा सकता है। एक ओर, यह उन प्रक्रियाओं के समुच्चय को निर्दिष्ट करता है, जो समूची विश्वव्यवस्था को समाहित करता है। दूसरी ओर, यह राज्यों तथा समाजों के बीच, जोकि एक पूरे वैश्विकसमुदाय का निर्माण कर सकती है, बढ़ती सघनता को प्रकट करता है। तदनुसार, वैश्विक प्रक्रियाओं केफैलाव के साथ-साथ उसका संघनीकरण भी साथ-साथ चलता है वैश्वीकरण के मुख्य कारक प्रौद्योगिकीय विकास तथा बाज़ार-प्रचलित आर्थिक विकास प्रणाली है।इन प्रक्रियाओं के द्वारा, वैश्वीकरण, राष्ट्र राज्यों के बीच अन्तर्निर्भरता का बीजारोपण कर सकती है।प्रशासनिक, राजनीतिक, सामाजिक -आर्थिक, सांस्कृतिक तथा प्रौद्योगिकीय बदलावों को दृष्टिगतरखते हुए, एक स्वतंत्र वातावरण के निर्माण की परिकल्पना है। वैश्वीकरण, प्रक्रियाओं, अंतरसंबंधों तथा सांस्कृतिक तथा वातावरणीय सभी शामिल कर सकती हैं।

22.  
भारत के मानचित्र में निम्नलिखित को दर्शाइएः (नक्शा संलग्न)      5
      (
अ)    अरावली श्रृंखला  (ब)    नीलगिरि
      (
स)    नर्मदा नदी      (द)    काजीरंगा
      (
इ)    कर्क रेखा
अथवा
     
निम्नलिखित मौसम एवं वायु संबंधी संकेतों को अपनी उत्तर पुस्तिका में दर्शाइए:
      (
अ)    वर्षा    (ब)    तड़ित झंझा
      (
स)    ओला   (द)    मंद समीर
      (
इ)    प्रबल समीर